इमोशनल सपोर्ट या सिर्फ एक्साइटमेंट... एक्सट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप Gleeden पर क्या ढूंढ रहे शादीशुदा लोग?
एक्स्ट्रा मैरिटल प्लेटफॉर्म Gleeden पर 65% पुरुष तो वहीं 35% महिलाए हैं. इस ऐप पर मर्द एक्साइटमेंट यानी थ्रिल के लिए आते हैं, जबकि उनकी पत्नियां इस बात से अनजान होती हैं.
Gleeden पर क्या ढूंढ रहे शादीशुदा लोग
आज के समय में शादीशुदा रिश्तों को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है. इसलिए लोग अब Gleeden जैसे एक्सट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. इस ऐप पर सिर्फ पुरुषों ही नहीं बल्कि महिलाओं का परसेंटेज भी बढ़ता जा रहा है, जो असल में हैरानी कर देने वाला है.
इस प्लेटफॉर्म पर लोगों की बढ़ती एक्टिविटी यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर शादीशुदा लोग यहां क्या तलाशने आ रहे हैं? क्या यह सिर्फ रोमांच और नएपन की चाहत है या फिर कहीं न कहीं इमोशनल सपोर्ट की कमी भी इसकी बड़ी वजह है?
60% से ज्यादा लोग आजमा रहे नॉन-ट्रेडिशनल डेटिंग तरीको
2024 में किए गए एक सर्वे में सामने आया कि भारत के टियर 1 और टियर 2 शहरों में रहने वाले शादीशुदा लोग अब पारंपरिक रिश्तों के ढांचे पर सवाल उठाने लगे हैं. समाज की अपेक्षाएं भले ही अभी भी पहले जैसी हैं, लेकिन लोगों की सोच में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है. 60% से ज्यादा लोगों ने माना कि वे अब नॉन-ट्रेडिशनल डेटिंग तरीकों जैसे ओपन रिलेशन या अन्य विकल्पों को लेकर पहले से ज्यादा खुले हुए हैं. यह दिखाता है कि लोग अब रिश्तों में अपनी जरूरतों और इच्छाओं को ज्यादा महत्व देने लगे हैं.
ऐप पर क्या ढूंढ रहे लोग
कई लोग इन प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ नएपन और रोमांच के लिए आते हैं. उदाहरण के तौर पर, एक शादीशुदा प्रोफेशनल अनिरुद्ध (नाम बदला गया) ने बताया कि वह ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल “सिर्फ थ्रिल और एक्साइटमेंट” के लिए करता है. लंबे समय तक एक ही रिश्ते में रहने के बाद कुछ लोगों को नई चीज़ों का एक्सपीरियंस करने की इच्छा होती है, और यही उन्हें इस तरह के प्लेटफॉर्म्स की ओर खींचती है.
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
इस ट्रेंड में एक बड़ी बात महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है. जहां 65% मर्द हैं, तो वहीं 35% महिलाएं इस ऐप का यूज कर रही हैं. Gleeden के अनुसार, आज की महिलाएं पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और कॉन्फिडेंट हो गई हैं, इसलिए वे अपने निजी फैसले खुद लेने लगी हैं. प्लेटफॉर्म पर महिलाओं को फ्री एक्सेस जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं, जिससे उनके लिए यहां आना आसान होता है और एक सुरक्षित माहौल बनाने की कोशिश की जाती है.
लेकिन इन आंकड़ों को देखकर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या यह बदलाव महिलाओं और पुरुषों की आज़ादी और सशक्तिकरण को दिखाता है, या फिर यह इस बात का साइन है कि मौजूदा रिश्तों में कहीं न कहीं इमोशनल कमी रह गई है, जिसे लोग बाहर जाकर पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं?




