Iran में फंसे 2 अमेरिकी विमान, खुद ही कर दिए तबाह- आखिर क्या था ऐसा सीक्रेट जिसकी भनक भी नहीं लगने देना चहता था US?
अमेरिका ने ईरान में फंसे अपने दो जहाजों को खुद ही तबाह कर दिया. ये काम एयरमैन को बचाने के ऑपरेशन को अंजाम देने के दौरान किया गया. इन दो जहाजों की कीमत 200 मिलियन डॉलर थी.
America Operation: अमेरिका ने ईरान के अंदर एक बेहद जोखिम भरे रेस्क्यू मिशन के दौरान अपने ही दो महंगे सैन्य विमान को नष्ट कर दिया. अधिकारियों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, तकनीकी खराबी के कारण यह विमान फंस गया था और दुश्मन के हाथ लगने का खतरा था.
यह ऑपरेशन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने “अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक” बताया. यह मिशन तब शुरू हुआ जब एक F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर मार गिराया गया. विमान के एक क्रू मेंबर को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन दूसरा एयरमैन, जो एक वरिष्ठ वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर था, 24 घंटे से ज्यादा समय तक दुश्मन के इलाके में छिपा रहा.
कैसे बची पायलट की जान?
The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, इस अधिकारी ने पहाड़ों की दरारों में छिपकर अपनी जान बचाई और 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी तक चढ़कर ईरानी सर्च टीमों से बचता रहा. बताया गया कि तेहरान ने उसे पकड़ने के लिए इनाम भी घोषित किया था, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच उसे पहले ढूंढने की होड़ तेज हो गई.
अमेरिकी विमानों ने ईरानी काफिलों पर हमले किए, जबकि स्पेशल फोर्सेस, जिनमें नेवी सील टीम 6 जैसी इकाइयां शामिल मानी जा रही हैं, गुप्त तरीके से आगे बढ़ीं. इस ऑपरेशन में Central Intelligence Agency ने भी अहम भूमिका निभाई और ईरानी अधिकारियों को एयरमैन की लोकेशन को लेकर गुमराह किया.
अमेरिका के कौनसे विमान थे और क्यों तबाह किए?
जिन विमानों को तबाह किया गया वह MC-130J थे. एयरमैन को खोजकर निकालने के बाद उसे इन विमानों तक लाया गया, जो ईरान के अंदर ही अस्थायी रेगिस्तानी रनवे पर खड़े थे. लेकिन ये लैंडिंग खराब होने और तकनीकी खराबीन होने की वजह से रेगिस्तान में फंसे थे.
उस समय ईरानी फोर्सेस तेजी से करीब आ रही थीं और इन विमानों को निकालने या ठीक करने का कोई सुरक्षित तरीका नहीं था. ऐसे में अमेरिकी कमांडरों को बड़ा फैसला लेना पड़ा. उन्होंने जोखिम उठाने के बजाय उन विमानों को वहीं नष्ट कर दिया ताकि उनकी संवेदनशील सैन्य तकनीक दुश्मन के हाथ न लग सके.
ऐसे एक-एक विमान की कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा होती है और इनमें अत्याधुनिक कम्युनिकेशन, नेविगेशन और स्पेशल ऑपरेशन सिस्टम होते हैं. सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फैसले हाई-रिस्क ऑपरेशनों में सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा होते हैं, जहां गोपनीय तकनीक की सुरक्षा, आर्थिक नुकसान से ज्यादा अहम होती है.
बचाए गए एयरमैन की क्या है कंडीशन?
इस रेस्क्यू मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशन जवान और कई विमान शामिल थे, जो घंटों तक दुश्मन के इलाके में सक्रिय रहे. ट्रंप ने कहा कि यह मिशन बहादुरी और कौशल का शानदार उदाहरण है. उन्होंने यह भी बताया कि बचाया गया अधिकारी गंभीर रूप से घायल था, लेकिन अब सुरक्षित है.
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इराक युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को युद्ध में गिराया गया. इस घटना ने अमेरिका के लिए एक बड़े रणनीतिक खतरे को जन्म दिया था, क्योंकि पायलट के दुश्मन के हाथ लगने का जोखिम था.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल ऑपरेशन ने न सिर्फ अमेरिका को एक बड़ी रणनीतिक हार से बचाया, बल्कि उसकी उस नीति को भी साबित किया जिसमें कहा जाता है कि किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ा जाता, भले ही इसके लिए अपने ही संसाधनों को क्यों न नष्ट करना पड़े.




